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Posts under ‘Kutchi Lokgeet’

मिणींके हॉरी जी शुभेच्छा ! हॅप्पी हॉरी !

कच्छी चोण ब जण के खपॅ कतरो

कच्छी चोण
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ब जण के खपॅ कतरो

धी के जमाइ कोठे व्या
पुतर के वहु पाढे वइ
हाणें ता पां ब ज रया.

हकडो छापो दुध जी थेली
रोज नंढी मटुकडी
पाणी जजो थइ प्यो.
चा ने खंड जा डाबला
मड खाली थीए.

कोलगेट\\मसरी डेढ मेणो हलॅ
एंशी ग्राम जी लक्स गोटी मेंणो हलॅ.

जमें में शाक वे
त दाळ न वे तोय हलॅ
रोगी दाळ वे तोय भयोभयो.
ब डीं ये खचडी ने छाय
सो कोबी, पा दुधी
अढीसो भींढा
लींबो-कोथमरी
हप्ते जो शाग

बाचको धउं, पंज कीला चोखा, कीलो तेल
गोंध थे प्यो राशन.

नंढा टोपला-छीबा ने वाटका
ब थाळी अठ डो वासण
हकडा कीलो विम पावडर
महिनो न खुटे.

खोपरे जी शीशी
पफ-पाउढर-टीला आंनण
फक्का थचा

प्रेम-लागणी ड्यो
हतरा ओछा
खल-मस्ती मोज मजा मेळावा खपें ज वठ्ठा लगे मठ्ठा

धी-जमाइ, पुतर-वउ
कडेंक अचें
पोतरा-पोतरी, दोयतरा-दोयतरी अचें
पसली, नवो वरे, वीया-वधाणां
ब-चार डीं
ने पोय उडी वने

अचीजा बईआर मलबो
पल में पाछा
बे जण

पोय यादुं, रटण ने जुनी गाल चोसार्युं!

ब जण के खपॅ कतरो

धी के जमाइ कोठे व्या
पुतर के वहु पाढे वइ
हाणें ता पां ब ज रया.

ब जण के खपॅ कतरो
ही ज सत्य आय
स्वीकार्यो ने माॅज से रोयॉ
: लहेर

अलग कच्छ राज्य : कीर्तिभाई खत्री साथे हकडी मुलाकात

कच्छ अलग राज्य भनायला आह्वान

कच्छ मे वधारेमे वधारेमे रोजगारजी तकुं ओभी करेला मिणीं कच्छीयें के अरज आय.
मिणींके कच्छी भासा मेज बोलेजी अरज आय.
जय कच्छ !

KachchhSeperateState_1611

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पंज महत्वजा कार्य पांजे कच्छ ला

पांजी मातृभूमी कच्छ, मातृभासा कच्छी ने पांजी संस्कृति ही पांला करे अमुल्य अईं. अज कच्छ में ऊद्योगिक ने खेतीवाडी में विकास थई रयो आय. बारनूं अलग अलग भासा बोलधल माडु प कच्छमे अची ने रेला लगा अईं. हॅडे वखत मे पां पांजी भासा ने संस्कृति के संभार्यूं ही वधारे जरूरी थई व्यो आय. अमुक महत्व जा कार्य जे अज सुधी पूरा थई व्या हुणा खप्या वा ने जे अना बाकी अईं हेनमेजा जे मिणीयां वधारे महत्वजा अईं से नीचे लखांतो.

१. चोवी कलाक जो कच्छी टी.वी.चेनल
अज जे आधुनिक काल में जमाने भेरो हले जी जरूर आय. अज मडे टी.वी. ने ईंटरनेट सुधी पोजी व्यो आय. हॅडे मे पांजा कच्छी माडु कच्छी भासा मे संस्कृति दर्सन, भजन, मनोरंजन, हेल्थ जी जानकारी ने ब्यो घणें मडे नेरेला मगेंता ही सॉ टका सची गाल आय. हेनजे अभाव में पांजा छोकरा ने युवक पिंढजी ऑडखाण के पूरी रीते समजी सकें नता. खास करेने जे कच्छ जे बार रेंता हु कच्छी भासा ने संस्कृति थी अजाण थींधा वनेंता.
कच्छी टी.वी.चेनल ते चॉवी कलाक कच्छी भासा में अलग अलग जात जा प्रोग्राम जॅडीते न्यूज, सीरीयल, हास्य कलाकार, खेतीवाडी जा सवाल जवाब, भजन, योगा,….नॅरेला मलें त कच्छी माडु धोनिया में केडा प हुअें कच्छ हनींजे धिल जे नजीक रॅ ने कच्छ प्रत्ये ने कच्छी भासा प्रत्ये गर्व वधॅ. भेगो भेगो पिंढजी ऑडखाण मजबुत थियॅ. ही कार्य मिणींया महत्वजो आय.
२. स्कूल में १ थी १० सुधी कच्छी भासा जो अभ्यास
अज कच्छ जे स्कूल में बो भासाएँ में सखायमें अचॅतो गुजराती ने ईंग्लीस. कच्छी भासा जे पांजी मातृभाषा आय ने घणे विकसित आय ही हकडी प स्कूल नाय जेडा १ थी १० धोरण सुधी सखायमें अचींधी हुए. कच्छी भासा जे उपयोग के वधारे में अचॅ त ही कच्छीयें ला करे सारी गाल आय ने स्कूल में सखायमें अचे त हनथी सारो कोरो. भोज, गांधीघाम जॅडे सहेरें में जेडा बई कम्युनीटी ( गुजराती,सींधी,हींदीभाषी,….) जा माडु प रेंता होडा ओप्सनल कोर्स तरीके रखेमें अची सगॅतो. १ थी १० क्लास सुधीजो अभ्यासक्रम पांजा कवि, साहित्यकार ने शिक्षक मलीने लखें त हेनके स्कूल में सखायला कच्छी प्रजा मजबूत मांग करे सगॅती. जॅडीते गुजरात, महाराष्ट्र,…. मे मातृभासा जो अभ्यासक्रम त हुऍतोज.

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Lakh Lakh vadhaiyun Dev Matang Dhani

कच्छी सिंधी आराधी वाणी

Kachchhi Rap

कच्छी लोक गीत Kachchhi Lokgeet Special: Geeta Rabari 2018

अचाॅ पखी परदेसी ACHO PAKHI PARDESHI | Kachchhi Geet| GEETA RABARI

सुपर हीट कच्छी गीत

Kachchhi Traditional Dance by Rajgor Trust Mulund

असीं कच्छी अईयुं ! जियॅ कच्छ !

असीं कच्छी अईयुं ! जियॅ कच्छ !

कच्छी गीत “असीं कच्छी अईयुं”
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असीं कच्छी अईयुं,
असीं कच्छी अईयुं,
असीं कच्छी अईयुं,
असीं कच्छी अईयुं

केर अयॉ असांके पोछॉता,
केर अयॉ असांके पोछॉता,
हरी असीं कच्छी अईयूँ इअं चोंता,
हरी असीं कच्छी अईयूँ इअं चों ता,

कच्छडेमें ही शरीर बन्धांणु,
हेन भूमि जो ऋणी गणांणु,
ऑपकर असीं न भोलूंता रे…ऐ ऐ (2)
कच्छी अईयूँ, कच्छी अईयूँ,
हरी असीं कच्छी अईयूँ … केर अयॉ

देशप्रेम के धेलडे में धरियुं,
यथाशक्ति सेवा असीं करियुं,
कछड़ेला ज जीयुंता रे…हो हो (2)
कच्छी अईयूँ, कच्छी अईयूँ,
हरी असीं कच्छी अईयूँ , केर अयॉ..

कच्छजे मेंट्टीजी ही आय खुमारी,
कइक मंजलुं पार करेजी आय तैयारी,
भले खबर पॅ ही धोनीया के..रे रे (2)
कच्छी अईयूँ, कच्छी अईयूँ,
हरी असीं कच्छी अईयूँ , केर अयॉ..

हर कम धंधे के असीं रसायो,
मोड्स अयुं एडो ठसायो,
केन कम में पण पाछा न पोंता …हो हो (2)
कच्छी अईयूँ, कच्छी अईयूँ,
हरी असीं कच्छी अईयूँ … केर अयॉ

कच्छी दोख में सदा खेल्या अईं
संस्कार ही घुडीये में मेल्या अईं
कच्छ जी कच्छीयत नेभाय रखबो…हो हो (2)
कच्छी अईयूँ, कच्छी अईयूँ,
हरी असीं कच्छी अईयूँ … केर अयॉ

देश छड़े परदेश असीं व्या,
ओत पण मोड़साई से असीं रेया,
केन्जो पण ध्रा न रखूंता रे.. ऐ ऐ (2)
कच्छी अईयूँ,कच्छी अईयूँ,
हरी असीं कच्छी अईयूँ … केर अयॉ

असीं कच्छी अईयुं,
असीं कच्छी अईयुं,
असीं कच्छी अईयुं,
असीं कच्छी अईयुं

जियॅ कच्छ !

लेखक : संदीप प्रागजी खाणिया

मुंजी मातृभुमि के नमन!