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Posts under ‘Intellectual Kutchi’

अलग कच्छ राज्य : कीर्तिभाई खत्री साथे हकडी मुलाकात

फुदडी मासी के बोन्वीटा पिरायो

कच्छी कविताजी हरिफाई Kachchhi (Kutchi) Poetry Competition 2019

कच्छी साहित्यकार अने लेखक ला नि:शुल्क ओनलाइन कविताजी हरिफाईहणे चालु आय

कच्छजे साहित्यकार के प्रोत्साहन देला, कच्छी कविताजी हरिफाई मळे 15 वरे जे मथे जा भारतीय ला निःशुल्क आय

2019 में, कच्छी कविताजी हरिफाई द्वारा नवे कविएँ जा सपना अने उमेद पुरी करेजो ध्येय आय. असी विविधता के पारख्युंत तथा दरेक प्रकारजी लखावट अने विषयजी कविता के आवकायुंता।

असीं मन्युंताक दरेक कविता पंढमें नोखी आय अईं हनजी सरस रचनाजा धणी अयो.

आंजी कविता हरिफाईमें अजज हलायो!

पेलो ईनाम – रू. 10,000/- (डो हजार)
ब्यो ईनाम – रू. 5,000/- (पंज हजार)
त्र्यो ईनाम – रू. 3,000/- (त्रे हजार)

हरिफाई हलायजी छेल्ली तारीख – 31 जुलाई 2019.

पसंद करायेली जीतेलियुं कविताउं जाहेर करेमें अचींघ्युं अने पुस्तकरूपे प्रकाशित थींध्युं। प्रकाशित कविएंके छपेली चोपडी प्राप्त थींधी।

दरेक भाग घनधल कविके यात्रता भाग घनेजो प्रमाणपत्र मालधो।

Kachchhi Kavita Sahitya Competition
This is to inform you, that the Kutchi Poetry Competition is open for entries. We would like to invite all eligible participants to submit poems online. In a way to encourage Kutchi writers, the Kutchi Poetry Competition is free for all Indians above the age of 15.   

In 2019, the competition aims to fulfil dreams and aspirations of budding poets from around India. We appreciate diversity and accept all styles and themes of poetry. We believe every poem is unique and you are the master of that beautiful creation.

1st Prize – INR 10,000/-

2nd Prize – INR 5,000/-

3rd Prize – INR 3,000/-

RULES:

Last date to Submit – 31st July 2019
Poems must be in Kutchi
Submission may be done in any script – Devnagiri or Gujarati.
The competition is open to Indian nationals.
You must be 15 years and above.
Poem should be original work of the participant.
Any length and style of poetry is accepted.
Previously published (online or physical) poems are NOT allowed.
Poems must be unpublished
Beginners are encouraged to participate.
Copyright of the poem remains with the author and the competition.
Poem may be accompanied with an optional translation in English, Gujarati or Hindi.
Multiple Entries are allowed. Only one poem per author will be considered for the prize.

Top Poems will be selected, announced and published as a book. Published poets will receive a copy of the book. Certificate of merit will be emailed to all participants.

Submit on:

www.kutchisahitya.wordpress.com

We would be honoured to receive your work and participation.

Thank You,
Team Kutchi Sahitya

मिणींके हॉरी जी शुभेच्छा ! हॅप्पी हॉरी !

कच्छी चोण ब जण के खपॅ कतरो

कच्छी चोण
—————

ब जण के खपॅ कतरो

धी के जमाइ कोठे व्या
पुतर के वहु पाढे वइ
हाणें ता पां ब ज रया.

हकडो छापो दुध जी थेली
रोज नंढी मटुकडी
पाणी जजो थइ प्यो.
चा ने खंड जा डाबला
मड खाली थीए.

कोलगेट\\मसरी डेढ मेणो हलॅ
एंशी ग्राम जी लक्स गोटी मेंणो हलॅ.

जमें में शाक वे
त दाळ न वे तोय हलॅ
रोगी दाळ वे तोय भयोभयो.
ब डीं ये खचडी ने छाय
सो कोबी, पा दुधी
अढीसो भींढा
लींबो-कोथमरी
हप्ते जो शाग

बाचको धउं, पंज कीला चोखा, कीलो तेल
गोंध थे प्यो राशन.

नंढा टोपला-छीबा ने वाटका
ब थाळी अठ डो वासण
हकडा कीलो विम पावडर
महिनो न खुटे.

खोपरे जी शीशी
पफ-पाउढर-टीला आंनण
फक्का थचा

प्रेम-लागणी ड्यो
हतरा ओछा
खल-मस्ती मोज मजा मेळावा खपें ज वठ्ठा लगे मठ्ठा

धी-जमाइ, पुतर-वउ
कडेंक अचें
पोतरा-पोतरी, दोयतरा-दोयतरी अचें
पसली, नवो वरे, वीया-वधाणां
ब-चार डीं
ने पोय उडी वने

अचीजा बईआर मलबो
पल में पाछा
बे जण

पोय यादुं, रटण ने जुनी गाल चोसार्युं!

ब जण के खपॅ कतरो

धी के जमाइ कोठे व्या
पुतर के वहु पाढे वइ
हाणें ता पां ब ज रया.

ब जण के खपॅ कतरो
ही ज सत्य आय
स्वीकार्यो ने माॅज से रोयॉ
: लहेर

कच्छ अलग राज्य भनायला आह्वान

कच्छ मे वधारेमे वधारेमे रोजगारजी तकुं ओभी करेला मिणीं कच्छीयें के अरज आय.
मिणींके कच्छी भासा मेज बोलेजी अरज आय.
जय कच्छ !

KachchhSeperateState_1611

(more…)

पंज महत्वजा कार्य पांजे कच्छ ला

पांजी मातृभूमी कच्छ, मातृभासा कच्छी ने पांजी संस्कृति ही पांला करे अमुल्य अईं. अज कच्छ में ऊद्योगिक ने खेतीवाडी में विकास थई रयो आय. बारनूं अलग अलग भासा बोलधल माडु प कच्छमे अची ने रेला लगा अईं. हॅडे वखत मे पां पांजी भासा ने संस्कृति के संभार्यूं ही वधारे जरूरी थई व्यो आय. अमुक महत्व जा कार्य जे अज सुधी पूरा थई व्या हुणा खप्या वा ने जे अना बाकी अईं हेनमेजा जे मिणीयां वधारे महत्वजा अईं से नीचे लखांतो.

१. चोवी कलाक जो कच्छी टी.वी.चेनल
अज जे आधुनिक काल में जमाने भेरो हले जी जरूर आय. अज मडे टी.वी. ने ईंटरनेट सुधी पोजी व्यो आय. हॅडे मे पांजा कच्छी माडु कच्छी भासा मे संस्कृति दर्सन, भजन, मनोरंजन, हेल्थ जी जानकारी ने ब्यो घणें मडे नेरेला मगेंता ही सॉ टका सची गाल आय. हेनजे अभाव में पांजा छोकरा ने युवक पिंढजी ऑडखाण के पूरी रीते समजी सकें नता. खास करेने जे कच्छ जे बार रेंता हु कच्छी भासा ने संस्कृति थी अजाण थींधा वनेंता.
कच्छी टी.वी.चेनल ते चॉवी कलाक कच्छी भासा में अलग अलग जात जा प्रोग्राम जॅडीते न्यूज, सीरीयल, हास्य कलाकार, खेतीवाडी जा सवाल जवाब, भजन, योगा,….नॅरेला मलें त कच्छी माडु धोनिया में केडा प हुअें कच्छ हनींजे धिल जे नजीक रॅ ने कच्छ प्रत्ये ने कच्छी भासा प्रत्ये गर्व वधॅ. भेगो भेगो पिंढजी ऑडखाण मजबुत थियॅ. ही कार्य मिणींया महत्वजो आय.
२. स्कूल में १ थी १० सुधी कच्छी भासा जो अभ्यास
अज कच्छ जे स्कूल में बो भासाएँ में सखायमें अचॅतो गुजराती ने ईंग्लीस. कच्छी भासा जे पांजी मातृभाषा आय ने घणे विकसित आय ही हकडी प स्कूल नाय जेडा १ थी १० धोरण सुधी सखायमें अचींधी हुए. कच्छी भासा जे उपयोग के वधारे में अचॅ त ही कच्छीयें ला करे सारी गाल आय ने स्कूल में सखायमें अचे त हनथी सारो कोरो. भोज, गांधीघाम जॅडे सहेरें में जेडा बई कम्युनीटी ( गुजराती,सींधी,हींदीभाषी,….) जा माडु प रेंता होडा ओप्सनल कोर्स तरीके रखेमें अची सगॅतो. १ थी १० क्लास सुधीजो अभ्यासक्रम पांजा कवि, साहित्यकार ने शिक्षक मलीने लखें त हेनके स्कूल में सखायला कच्छी प्रजा मजबूत मांग करे सगॅती. जॅडीते गुजरात, महाराष्ट्र,…. मे मातृभासा जो अभ्यासक्रम त हुऍतोज.

(more…)

विश्वमात्रृभाषा डीं

अज २१ फेब्रुवारी विश्वमात्रृभाषा डीं निमित्तॅ मिणीके शुभेच्छा! वधाई!
सुखडीमे कच्छीभाषाजी नीलक हलाई आय से माणींजा!
छाल पां नीला रो ઍडी धुआ

मा,मात्रृभूमि ने मात्रृभाषाके जुको भोले तो
तेन्जी भावि पेढी ओनींके ज भुली विनेती

અજ ૨૧ ફેબ્રુવારી વિશ્વમાત્રૃભાષા ડી નિમિત્તૅ મિણીકે શુભેચ્છા! વાધાઈ!
સુખડીમે કચ્છીભાષાજી નીલક હલાઈ આય સે માણીજા!
છાલ પાં નીલા રો ઍડી ધુઆ🙏🏻

अज पां मिणीके कच्छीवाणीके माणेजी
जाणेजी
नाणेजी(मूलववी)
मा बोलीजो मोभो वधे,मान वधे,पांके पांजी भाषाजो गौरव थीये ते ला जुम्भीने मॅनथ केजी!
अज सजो डी,मा कच्छडीजागुण लजणा वतयणा गाणां ने गजायणा ई ज पांजो धरम!!

અજ પાં મિણીકે કચ્છીવાણીકે માણેજી
જાણેજી
નાણેજી(મૂલવવી)
મા બોલીજો મોભો વધે,માન વધે,પાંકે પાંજી ભાષાજો ગૌરવ થીયે તે લા જુમ્ભીને મૅનથ કેજી!
અજ સજો ડી,મા કચ્છડીજાગુણ લજણા વતયણા ગાણાં ને ગજાયણા ઈ જ પાંજો ધરમ!!

पांजे कच्छ मे पांजी हाजरी

पांजो कच्छ भधली रह्यो आय.
घणें रीते प्रगती करे रह्यो आय. तें छता पांजे मादरे वतन मे पांजी हाजरी इतरी ओछी कोला आय ?
कच्छ मे औद्योगिक क्रांति थई रई आय. खेती मे नवा नवा प्रयोगो ने आविष्कार थई रह्या अईं. जडा खाली मोंग, गोवार, बाजर थिंधा वा हणें केळा, केसर केरी, दाडम, खारक जा भगीचा लहेराइ रह्या अईं.
डेरी उद्योग जे विकासथी पशुपालन में प तेजी आवई आय. गायुं, मेइजा तबेला भनेला लगा अईं. अरे……हणें त ओठडी जो दूध प डेरी मे वनेतो अतरे ओठ, ओठडी जी संख्या प वधेला लगी आय.
बांधकाम जी प्रवृत्ति मे प तेजी आवई आय हॅडेमे पांजी सनी हाजरी, गेरहाजरी मन मगज के चंधामे वजॅती.

कोरो पां फक्त मुंबई जी तकलादी ने जीवलेण भौतिक सोख समृद्धि मे फसेला रॉबो . लखेंजा ने हणें करोडेंजा वन बेड, टु बेड के थ्री बेड होल किचन जे सांकडे फ्लेट ला, कच्छजे वडे….डेली वारे आंगण , ओसरी, करइ वारे घरें के भोली वॅबो .
विशाळ जमीनें के पारकें जे हवाले करेने कच्छ जी भूमि के,पांजी मातृभूमि के पां भोली वॅबो ?
कच्छ साथेजो पांजो सबंध कोरो फक्त दहेरासर जी धजा, वर्षगांठ, पयुर्षण के माताजी जी पॅडी पूरतो ज रखबो ?
मुंबई जी गर्दी मे गुंगळाइ ने मरे पॅला ही विचारेजो जरुरी आय……
जय कच्छ !

आगम वाणी

कच्छमे लगभग चॉदोसो वरें पॅला श्री मामैयदेव थईं व्या.
श्री मामैयदेवजी भविष्यवाणी सची पई रई आय हॅडो लगेतो :

[१]कुंवर विकनींडा काठीयुं,
रा विकनींडा घाह,
‘मामै मातंग, चे,
नाणे विकंधा न्याह.

[२] खचरडा खीर खायेंदा,
तगडा थींदा ताजी,
वडा माडु वेही रोंधा,
पूंछा ईंधा पाजी.

[३]सनेजीवेजी शरम न रोंधी,
न रोंधी मनमें मेर,
धन खर्चे धर्मी चवांधा,
कंधा वडे से वेर.

[४]मेडीयुं पाडे ने मारग थिन्दा,
कबरमें थीन्दा घर,
अस्त्री वेंधी तखत पे,
जाळी लोदिन्डे नर.

[५]शाह छडिन्धा शाहपणुं,
सच्च छडिन्धा शेठ,
भामण भणन छडिन्धा,
जाडेजा कंधा वेठ.

[६]भुख माडु ते भड ध्रिजंदा,
शियाळे ध्रिजंदा सीं,
पे ध्रिजंदा पुतरते,
हेडा अच्चेंन्धा डी.

असीं कच्छी अईयुं ! जियॅ कच्छ !

कच्छी गीत “असीं कच्छी अईयुं”
*****************************

असीं कच्छी अईयुं,
असीं कच्छी अईयुं,
असीं कच्छी अईयुं,
असीं कच्छी अईयुं

केर अयॉ असांके पोछॉता,
केर अयॉ असांके पोछॉता,
हरी असीं कच्छी अईयूँ इअं चोंता,
हरी असीं कच्छी अईयूँ इअं चों ता,

कच्छडेमें ही शरीर बन्धांणु,
हेन भूमि जो ऋणी गणांणु,
ऑपकर असीं न भोलूंता रे…ऐ ऐ (2)
कच्छी अईयूँ, कच्छी अईयूँ,
हरी असीं कच्छी अईयूँ … केर अयॉ

देशप्रेम के धेलडे में धरियुं,
यथाशक्ति सेवा असीं करियुं,
कछड़ेला ज जीयुंता रे…हो हो (2)
कच्छी अईयूँ, कच्छी अईयूँ,
हरी असीं कच्छी अईयूँ , केर अयॉ..

कच्छजे मेंट्टीजी ही आय खुमारी,
कइक मंजलुं पार करेजी आय तैयारी,
भले खबर पॅ ही धोनीया के..रे रे (2)
कच्छी अईयूँ, कच्छी अईयूँ,
हरी असीं कच्छी अईयूँ , केर अयॉ..

हर कम धंधे के असीं रसायो,
मोड्स अयुं एडो ठसायो,
केन कम में पण पाछा न पोंता …हो हो (2)
कच्छी अईयूँ, कच्छी अईयूँ,
हरी असीं कच्छी अईयूँ … केर अयॉ

कच्छी दोख में सदा खेल्या अईं
संस्कार ही घुडीये में मेल्या अईं
कच्छ जी कच्छीयत नेभाय रखबो…हो हो (2)
कच्छी अईयूँ, कच्छी अईयूँ,
हरी असीं कच्छी अईयूँ … केर अयॉ

देश छड़े परदेश असीं व्या,
ओत पण मोड़साई से असीं रेया,
केन्जो पण ध्रा न रखूंता रे.. ऐ ऐ (2)
कच्छी अईयूँ,कच्छी अईयूँ,
हरी असीं कच्छी अईयूँ … केर अयॉ

असीं कच्छी अईयुं,
असीं कच्छी अईयुं,
असीं कच्छी अईयुं,
असीं कच्छी अईयुं

जियॅ कच्छ !

लेखक : संदीप प्रागजी खाणिया

नारी

नारी वगर जो नर सुनो ।।
नर वगर जी नारी सुनी ।।
घर मे भरे ई पाणी ।।
तोय ईज घरजी राणी ।।
खाधो पीधो ई खाराय ।।
सेवा करे सजे धरजी ।।
माईत्रें के अचे छडी ।।
पारके के पंढजा करे ।।
तोय पा अनजो अपमान करयुं ।।
थीये कजीयो त ।।
चोप चाप वे ई सोणी ।।
नारी ऊमंग जी खाण ।।
सजॅन ईज नारी जो सणगार ।।
हाणे ता करयो अनजो सनमान ।।

रुपीयें जी रामायण

रुपीयें जी रामायण
*************
रुपीये जी माया में,
माडु आय फसायो……
रुपीयें पोठीयां माडु,
थ्यो आय रधवायो…….

रुपीयें लां करे माडु,
नीति के आय भुलेयो……
रुपीयें लां करे माडु,
खोटे धंधे में आय फसायो…

धोड -धक करें तोय ,
न मेले नवडां……
नवडा मेलायेलां ,
उधां – सुधां करे गतकडां…..

डोलर आय उचों ने,
रुपीयो आय नीचों……
ईन में माडु जो ,
कीं भराजे खींचो…….

उधार खणी ने प माडु,
करे खोटा धंधा……
पोय ईन में माडु जा ,
कीं अचे संधा……

रुपीयें जी लालच में,
माडु करे मथामण……
रुपीया खटेलां थीये,
माडु कीं जो कीं हेराण……

खरेखर आय ई ,
“रुपीयें जी रामायण”,
से जींदगी भर खोटेवारी,
नांय ई “रुपीयें जी रामायण”.

Reference : Whatsapp msg

कच्छी प्रवचन. Kachchhi Pravachan

Kachchhi SMS

Kachchhi ji Jabaan
Meethi .. Jalebi Jedi,
Kachchhi Jo Gusso
Garam.. Fulke Jedo,
Kachchhi Jo Dhil
Naram…Ice Cream Jedo,
Kachcchi Jo Saath
Chatpato.. Keri Gundhe je Athane Jedo
Kachcchi jo confidence
Kadak .. Khakre Jedo
Kachchhi Jo Swabhav
Milansar.. Daal Dhokri Jedo

Moral : Kachcchi Saathe Ronda Tah Kade Bhokya Nai Royo 🙂

Prem Ve na Ve
Pa Nafrat na rakhja
Malejo thiye na thiye
Sambhandh Jadvi Rakhja
Dukh ve n ve
Dilaso dhil thi dija
Call Thiye na thiye
Pa SMS jaroor Karija 🙂 🙂

प्लास्टिक

जबले में दूध मिले, जबले में चाय..
जबले में घारु मिले, जबले में छाय..
जबले में साकभाजी, जबले में गांठीया..
जबले में ‘रोटी’ मिले, भेरा चटणीने भजीया..
रंज को आड़े नतो, खें अॅठ भेरा जभला..
पोय रिबाई मरें, पांजा जीव अबोला..
हटमें प्लास्टिक, प्लास्टिक होटल में…
पाणीजी पाऊच मिलें, पाणी मिले बोटल में..
वेफर प्लास्टिक में, प्लास्टिकमें बिसकीट..
भजर-चुन भेरा, गुटकेला ई ज प्लास्टिक..
निसाणमें प्लास्टिक, मिंधर में प्लास्टिक..
बगीचे में प्लास्टिक, जाडी-जांखरे में प्लास्टिक..
घरमें प्लास्टिक, घर बारां प्लास्टिक
जित डिसॉ- जडें डिसॉ, प्लास्टिक – प्लास्टिक..
हाव-भाव प्लास्टिकजा, प्लास्टिकजी वाणीं..
खिल खोटी प्लास्टिकजी, ‘दास’ माडु कंईयें जाणीं…
: पी. जी. सोनी ‘दास’