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Posts under ‘Kutchi Kavita,Chovak,Sahitya (Poetry, Quotes, Literature)’

कडॅक अचींजा

कडॅक अचींजा
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प्रेमसे नोतरो जली ,कडॅक अचींजा
हूंभसे नोतरो जली, कडॅक अचींजा

वरे सजो रखातो, जाध करीजा
चांतो सामे हली, कडॅक अचींजा

बाना हलधा न कीं,मूधत डियूं वडी
मन करे ज भली, कडॅक अचींजा

भो भो ने भले भले, कडॅ म कईजा
कढो म गाल खिली, कडॅक अचींजा

भरी रखीयूं जाधूं, कांत केनीरीयूं
बारा कढीबो मिली, कडॅक अचींजा

*कांतिलाल कुंवरजी सावला कांत तुमडी*

खाराई ओठ

अलग कच्छ राज्य : कीर्तिभाई खत्री साथे हकडी मुलाकात

कच्छ अलग राज्य भनायला आह्वान

कच्छ मे वधारेमे वधारेमे रोजगारजी तकुं ओभी करेला मिणीं कच्छीयें के अरज आय.
मिणींके कच्छी भासा मेज बोलेजी अरज आय.
जय कच्छ !

KachchhSeperateState_1611

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पंज महत्वजा कार्य पांजे कच्छ ला

पांजी मातृभूमी कच्छ, मातृभासा कच्छी ने पांजी संस्कृति ही पांला करे अमुल्य अईं. अज कच्छ में ऊद्योगिक ने खेतीवाडी में विकास थई रयो आय. बारनूं अलग अलग भासा बोलधल माडु प कच्छमे अची ने रेला लगा अईं. हॅडे वखत मे पां पांजी भासा ने संस्कृति के संभार्यूं ही वधारे जरूरी थई व्यो आय. अमुक महत्व जा कार्य जे अज सुधी पूरा थई व्या हुणा खप्या वा ने जे अना बाकी अईं हेनमेजा जे मिणीयां वधारे महत्वजा अईं से नीचे लखांतो.

१. चोवी कलाक जो कच्छी टी.वी.चेनल
अज जे आधुनिक काल में जमाने भेरो हले जी जरूर आय. अज मडे टी.वी. ने ईंटरनेट सुधी पोजी व्यो आय. हॅडे मे पांजा कच्छी माडु कच्छी भासा मे संस्कृति दर्सन, भजन, मनोरंजन, हेल्थ जी जानकारी ने ब्यो घणें मडे नेरेला मगेंता ही सॉ टका सची गाल आय. हेनजे अभाव में पांजा छोकरा ने युवक पिंढजी ऑडखाण के पूरी रीते समजी सकें नता. खास करेने जे कच्छ जे बार रेंता हु कच्छी भासा ने संस्कृति थी अजाण थींधा वनेंता.
कच्छी टी.वी.चेनल ते चॉवी कलाक कच्छी भासा में अलग अलग जात जा प्रोग्राम जॅडीते न्यूज, सीरीयल, हास्य कलाकार, खेतीवाडी जा सवाल जवाब, भजन, योगा,….नॅरेला मलें त कच्छी माडु धोनिया में केडा प हुअें कच्छ हनींजे धिल जे नजीक रॅ ने कच्छ प्रत्ये ने कच्छी भासा प्रत्ये गर्व वधॅ. भेगो भेगो पिंढजी ऑडखाण मजबुत थियॅ. ही कार्य मिणींया महत्वजो आय.
२. स्कूल में १ थी १० सुधी कच्छी भासा जो अभ्यास
अज कच्छ जे स्कूल में बो भासाएँ में सखायमें अचॅतो गुजराती ने ईंग्लीस. कच्छी भासा जे पांजी मातृभाषा आय ने घणे विकसित आय ही हकडी प स्कूल नाय जेडा १ थी १० धोरण सुधी सखायमें अचींधी हुए. कच्छी भासा जे उपयोग के वधारे में अचॅ त ही कच्छीयें ला करे सारी गाल आय ने स्कूल में सखायमें अचे त हनथी सारो कोरो. भोज, गांधीघाम जॅडे सहेरें में जेडा बई कम्युनीटी ( गुजराती,सींधी,हींदीभाषी,….) जा माडु प रेंता होडा ओप्सनल कोर्स तरीके रखेमें अची सगॅतो. १ थी १० क्लास सुधीजो अभ्यासक्रम पांजा कवि, साहित्यकार ने शिक्षक मलीने लखें त हेनके स्कूल में सखायला कच्छी प्रजा मजबूत मांग करे सगॅती. जॅडीते गुजरात, महाराष्ट्र,…. मे मातृभासा जो अभ्यासक्रम त हुऍतोज.

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नाय थका

*नाय थका..*

पग थका.. घुडा थका.
मंजिल ते पोजे जा थडकार
नाय थका..

भले बायपास वे के एन्जियोग्राफी ..
जिंदगी माणे जा धबकार
नाय थका..

भले रमुंता हेवर ओनलाईन ते..
पण चलक चलाणी रमे जा
ओरता नाय थका..

भले हॅवर मलुंता फेस बुक जे फरिये ने वोटस अप जे अंगण मे
पण बईयार फेस टु फेस मलेजा अरमान नाय थका..

मतलबी धोनिया मे कोय कोय जो नाय..
पण मतलब वगर याद कईंधल धोस्तार नाय थका

-विनोद

कच्छी चॉवक : धाबा सॅन करेजी सग़ती वॅ से हॉरी रमॅ

कच्छी चॉवक- ४६ 👍

धाबा सॅन करेजी सग़ती वॅ से हॉरी रमॅ.

माईक्रोफिक्सन
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नॅर ईशा, हीं धिरजी वेनीयें
त स्केटिंग न सिखाबो.तॉजी
जॅडल आकांक्षा के नॅर,सिखॅती
छणॅती,उभी थीयॅती, नीरा
चकामा ने ढीमणा पेंता, हथ
पग छोलजेंता,तांय स्केटिंग
सिखॅजी जिधके छडे नती.
सरीरतें घा पोंधा सेधवाईयें
सें सोंजा थिई वेंधा. छणधो,
उठींधो ने धोड़धो,ऊजसिखी
सगंधो. सरीरतें धाग पोंधा से त मटी वेंधा, ई तूं सॅन न
करी सगॅं त सवारेनूं क्लास
– में म अचीज. आकांक्षा
जॅडी हींमत रखनीयें त तॉके
कोय अटकाई न सगंधो.
अज काउन्चर तानूं तोजी
फी पाछी मिलंधी. सॉरी
ईशा ! तॉकेज निकी करेजो
आय क स्केटिंग सिखॅजी
जिध तॉमें कितरी आय ?

ब्ये डीं नों वरॅजी ईशा टाईट
फीट स्केटिंग ड्रेस ने बूट साथे
कलासजे हॉलमें उगेजे छ
वगेंमें हाजर वी.

अठ मेणे पोय

अज स्केटिंग शो जे फिनालेमें ईशाके रजत मॅडल
मुख्य मंत्री गलेमें पेरायांते
तॅर इनजा सर मिणीया
वधू खुस हूआ.

: भानुबेन

ईनजो नालो माडु

रंग

कच्छी चॉवक :काठ जी कुनीं हिकीयार चडॅ

🔸कच्छी साहित्य गृप मुंबई🔸

. 🔹 कच्छी चॉवक – ३ 🔹

. काठ जी कुनीं हिकीयार चडॅ

काठ ईतरे क लकडेजी कुनी के पां चुल ते चडा઼ईयो त ईन समो तें पां पांजो रधो खाधो रधे सगों प काठ जी हूंधे उबारे से ई धुखी विंञे नें बिईयार फिरी कम अचे ઍ
एडी रॅ नती

. ▪️भावार्थ ▪️
कोय प सबंध क वॅवार जो पां सामले माडू जे विश्वास जे कारणे हिकीयार पांजो स्वार्थ साधे सगों अथवा ईन सबंध जो गॅर उपयोग करे सगों प ऐडो करेला वेंधे पां ई सबंध विंञाय गिनधा हूओंता

. 🔸संकलन – रजूआत🔸
हरेश दरजी ‘कसभी’
‌ नलीया कच्छ

कें से कीं गाल केणी

कें से कीं गाल केणी
ई पण संस्कार सिखाइता ।
मंधर में ब हथ जोड़े ,
गुरु से मथो नमाय
गाल केणी खपे ।

“मा ” विटे पेट छुटी ने
बापा से मान मोभो रखी
गाल कराजे ।

,भा,से धिल खोले ,
,भेण,से हीयारी डिईने
गाल केणी खपे ।

बार – बच्चे से प्यार से,
ने घरवारी से
हीये जो हट
खोले ने गाल कराजे,
सं, कानजी “रिखीयो”

मिच्छामी दुक्कडम

*क्षमा…समा…खमा…*
******************
*हलधे, चलधे, बोलधे*
*करीयांतो आंऊ भुलूं*
*डिसा नतो आंऊ कीं*
*नॅरीयांतो बेंज्यूं भुलूं*
*अज सवंत्सरी जे डीं*
*भुलूं हिकडे઼बेंज्यूं भुलूं*
*वसंत अज धिलसें मिलूं*
*खमाईयूं पां भुलीने भुलूं*
💐💐💐💐💐💐💐
———————————– *वसंत मारू…चीआसर जा*
🙏 *मिच्छामी दुक्कडम*🙏

रक्षाबंधन प्रसंगे कच्छी गीत : भॅणूं

https://youtu.be/LZZZE-lZx38

वीर पसली

🌹🌹”वीर पसली” 🌹🌹*

*पसली रे….मुजे वीरे जी पसली,*
*मुजे तां भा जी रखई आउं पसली,*
*अचे ना मुजे भा ते कोय ओखी,*
*पसली रे…मुजे वीरे जी पसली,*
*जजो जीये सीरे जेडो मेठडो मुजो वीरो,*
*सोकन डींया जोरे करे सोपारी ने टोपरो,*
*पसली रे…मुजे वीरे जी पसली,*
*डेण-डाकण, सीं ने सप,ना कपे भा जो रस्तो,*
*एतरे ऊंभरे ते सत वेरा फेराईआं धस्तो,*
*पसली रे…मुजे वीरे जी पसली,*
*चंञु-भलो सुखी संसार रे मुजे भाजो,*
*माडी वेटे धोआ करीआं डीं-रातजो,*
*पसली रे…मुजे वीरे जी पसली,*
*”अजनबी” भा लखे भेणे ला पसली,*
*अमर रे भा-भेणे जो पेरभ ई पसली,*
*पसली रे…मुजे वीरे जी पसली*
: रमणिक साह