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मिच्छामी दुक्कडम

*क्षमा…समा…खमा…*
******************
*हलधे, चलधे, बोलधे*
*करीयांतो आंऊ भुलूं*
*डिसा नतो आंऊ कीं*
*नॅरीयांतो बेंज्यूं भुलूं*
*अज सवंत्सरी जे डीं*
*भुलूं हिकडे઼बेंज्यूं भुलूं*
*वसंत अज धिलसें मिलूं*
*खमाईयूं पां भुलीने भुलूं*
💐💐💐💐💐💐💐
———————————– *वसंत मारू…चीआसर जा*
🙏 *मिच्छामी दुक्कडम*🙏

शुभ गणेश चतुर्थी

रक्षाबंधन प्रसंगे कच्छी गीत : भॅणूं

https://youtu.be/LZZZE-lZx38

स्वतंत्रता डींजी जजी वधायुं

🇮🇳 आं मणीं के ७५ मो स्वतंत्रता डींजी जजी जजी वधायुं खूब खूब शुभेच्छाउं. स्वतंत्रताजो अमृत महोत्सवजो ही वरें देशवासीओमें नवी उर्जा , नवी चेतना अने ऊमंग भर्यो वने.🇮🇳

जय हिन्द!,पांजो कच्छडो,पांजे संस्कृति के नमन

🙏 मूजी मातृभूमि के नमन🙏

वीर पसली

🌹🌹”वीर पसली” 🌹🌹*

*पसली रे….मुजे वीरे जी पसली,*
*मुजे तां भा जी रखई आउं पसली,*
*अचे ना मुजे भा ते कोय ओखी,*
*पसली रे…मुजे वीरे जी पसली,*
*जजो जीये सीरे जेडो मेठडो मुजो वीरो,*
*सोकन डींया जोरे करे सोपारी ने टोपरो,*
*पसली रे…मुजे वीरे जी पसली,*
*डेण-डाकण, सीं ने सप,ना कपे भा जो रस्तो,*
*एतरे ऊंभरे ते सत वेरा फेराईआं धस्तो,*
*पसली रे…मुजे वीरे जी पसली,*
*चंञु-भलो सुखी संसार रे मुजे भाजो,*
*माडी वेटे धोआ करीआं डीं-रातजो,*
*पसली रे…मुजे वीरे जी पसली,*
*”अजनबी” भा लखे भेणे ला पसली,*
*अमर रे भा-भेणे जो पेरभ ई पसली,*
*पसली रे…मुजे वीरे जी पसली*
: रमणिक साह

घाम जो चॉरो

Kutchi Gal Bol Final Part 1 | Kutchi Bhasha, Sahitya ane Sanskrutik Samiti

ऋषि चिंतन जे सानिध्य में

अलग कच्छ राज्य : कीर्तिभाई खत्री साथे हकडी मुलाकात

कच्छ अलग राज्य भनायला आह्वान

कच्छ मे वधारेमे वधारेमे रोजगारजी तकुं ओभी करेला मिणीं कच्छीयें के अरज आय.
मिणींके कच्छी भासा मेज बोलेजी अरज आय.
जय कच्छ !

KachchhSeperateState_1611

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पंज महत्वजा कार्य पांजे कच्छ ला

पांजी मातृभूमी कच्छ, मातृभासा कच्छी ने पांजी संस्कृति ही पांला करे अमुल्य अईं. अज कच्छ में ऊद्योगिक ने खेतीवाडी में विकास थई रयो आय. बारनूं अलग अलग भासा बोलधल माडु प कच्छमे अची ने रेला लगा अईं. हॅडे वखत मे पां पांजी भासा ने संस्कृति के संभार्यूं ही वधारे जरूरी थई व्यो आय. अमुक महत्व जा कार्य जे अज सुधी पूरा थई व्या हुणा खप्या वा ने जे अना बाकी अईं हेनमेजा जे मिणीयां वधारे महत्वजा अईं से नीचे लखांतो.

१. चोवी कलाक जो कच्छी टी.वी.चेनल
अज जे आधुनिक काल में जमाने भेरो हले जी जरूर आय. अज मडे टी.वी. ने ईंटरनेट सुधी पोजी व्यो आय. हॅडे मे पांजा कच्छी माडु कच्छी भासा मे संस्कृति दर्सन, भजन, मनोरंजन, हेल्थ जी जानकारी ने ब्यो घणें मडे नेरेला मगेंता ही सॉ टका सची गाल आय. हेनजे अभाव में पांजा छोकरा ने युवक पिंढजी ऑडखाण के पूरी रीते समजी सकें नता. खास करेने जे कच्छ जे बार रेंता हु कच्छी भासा ने संस्कृति थी अजाण थींधा वनेंता.
कच्छी टी.वी.चेनल ते चॉवी कलाक कच्छी भासा में अलग अलग जात जा प्रोग्राम जॅडीते न्यूज, सीरीयल, हास्य कलाकार, खेतीवाडी जा सवाल जवाब, भजन, योगा,….नॅरेला मलें त कच्छी माडु धोनिया में केडा प हुअें कच्छ हनींजे धिल जे नजीक रॅ ने कच्छ प्रत्ये ने कच्छी भासा प्रत्ये गर्व वधॅ. भेगो भेगो पिंढजी ऑडखाण मजबुत थियॅ. ही कार्य मिणींया महत्वजो आय.
२. स्कूल में १ थी १० सुधी कच्छी भासा जो अभ्यास
अज कच्छ जे स्कूल में बो भासाएँ में सखायमें अचॅतो गुजराती ने ईंग्लीस. कच्छी भासा जे पांजी मातृभाषा आय ने घणे विकसित आय ही हकडी प स्कूल नाय जेडा १ थी १० धोरण सुधी सखायमें अचींधी हुए. कच्छी भासा जे उपयोग के वधारे में अचॅ त ही कच्छीयें ला करे सारी गाल आय ने स्कूल में सखायमें अचे त हनथी सारो कोरो. भोज, गांधीघाम जॅडे सहेरें में जेडा बई कम्युनीटी ( गुजराती,सींधी,हींदीभाषी,….) जा माडु प रेंता होडा ओप्सनल कोर्स तरीके रखेमें अची सगॅतो. १ थी १० क्लास सुधीजो अभ्यासक्रम पांजा कवि, साहित्यकार ने शिक्षक मलीने लखें त हेनके स्कूल में सखायला कच्छी प्रजा मजबूत मांग करे सगॅती. जॅडीते गुजरात, महाराष्ट्र,…. मे मातृभासा जो अभ्यासक्रम त हुऍतोज.

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पग जमींतेज टकधा

टुंके लमें हलधें