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सच्ची जीत

Kachchhi quotes

पांजो वतन

समोजी गाल

फिरी जनम गिनजा

कवि तेज कवितायें द्वारा स्वार्थ अने परमार्थज्युं
गालियुं क्यां अयां. कितक माडूजी छांभ पण कढ्यां
अया. पण अज तां ईनीजो
आत्मा स्वर्गमें विठो विठो गज गज पोरसांईंधो हूंधो
एडी श्रध्धांजलि डींधे पां
पांजे हिंयेमें सडाकाळ स्थापित क्या अईं. “कविवर
कोय कच्छजो बचो जण
आंके भूली सगे ईन गालमें
माल नाय. प अञा आंजी जरूरत अय. फिरी जनम
गिनजा. एडी अरधांस.
भानुबेन.🙏🙏🙏

भेगा रॉजा

डेतर

*डेतर*
********
धूसको डने,डग
छाय जो छमकार,
सूंयो कनते,
तासरी खणी करी,
चे मावडी मखण,
*डॅ*
**************
*तान्का*
मखण मानी,
छबल भरे गिन,
लोंधा भरेने.
लगाय मखण के,
ध्रो सठ खाय गिन.
**************
*हाईकु*
मखण खाधों,
मानी ते लगायने.
मजा आवई.
************
*साईजीकी*
मजा त अचेन,
घरजो वे,
दूध.
गोंयु मैयुं पिंढ़जीयुं.

*ज्यंती छेडा पुनडीवारा*

अलग कच्छ राज्य : कीर्तिभाई खत्री साथे हकडी मुलाकात

कच्छ अलग राज्य भनायला आह्वान

कच्छ मे वधारेमे वधारेमे रोजगारजी तकुं ओभी करेला मिणीं कच्छीयें के अरज आय.
मिणींके कच्छी भासा मेज बोलेजी अरज आय.
जय कच्छ !

KachchhSeperateState_1611

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पंज महत्वजा कार्य पांजे कच्छ ला

पांजी मातृभूमी कच्छ, मातृभासा कच्छी ने पांजी संस्कृति ही पांला करे अमुल्य अईं. अज कच्छ में ऊद्योगिक ने खेतीवाडी में विकास थई रयो आय. बारनूं अलग अलग भासा बोलधल माडु प कच्छमे अची ने रेला लगा अईं. हॅडे वखत मे पां पांजी भासा ने संस्कृति के संभार्यूं ही वधारे जरूरी थई व्यो आय. अमुक महत्व जा कार्य जे अज सुधी पूरा थई व्या हुणा खप्या वा ने जे अना बाकी अईं हेनमेजा जे मिणीयां वधारे महत्वजा अईं से नीचे लखांतो.

१. चोवी कलाक जो कच्छी टी.वी.चेनल
अज जे आधुनिक काल में जमाने भेरो हले जी जरूर आय. अज मडे टी.वी. ने ईंटरनेट सुधी पोजी व्यो आय. हॅडे मे पांजा कच्छी माडु कच्छी भासा मे संस्कृति दर्सन, भजन, मनोरंजन, हेल्थ जी जानकारी ने ब्यो घणें मडे नेरेला मगेंता ही सॉ टका सची गाल आय. हेनजे अभाव में पांजा छोकरा ने युवक पिंढजी ऑडखाण के पूरी रीते समजी सकें नता. खास करेने जे कच्छ जे बार रेंता हु कच्छी भासा ने संस्कृति थी अजाण थींधा वनेंता.
कच्छी टी.वी.चेनल ते चॉवी कलाक कच्छी भासा में अलग अलग जात जा प्रोग्राम जॅडीते न्यूज, सीरीयल, हास्य कलाकार, खेतीवाडी जा सवाल जवाब, भजन, योगा,….नॅरेला मलें त कच्छी माडु धोनिया में केडा प हुअें कच्छ हनींजे धिल जे नजीक रॅ ने कच्छ प्रत्ये ने कच्छी भासा प्रत्ये गर्व वधॅ. भेगो भेगो पिंढजी ऑडखाण मजबुत थियॅ. ही कार्य मिणींया महत्वजो आय.
२. स्कूल में १ थी १० सुधी कच्छी भासा जो अभ्यास
अज कच्छ जे स्कूल में बो भासाएँ में सखायमें अचॅतो गुजराती ने ईंग्लीस. कच्छी भासा जे पांजी मातृभाषा आय ने घणे विकसित आय ही हकडी प स्कूल नाय जेडा १ थी १० धोरण सुधी सखायमें अचींधी हुए. कच्छी भासा जे उपयोग के वधारे में अचॅ त ही कच्छीयें ला करे सारी गाल आय ने स्कूल में सखायमें अचे त हनथी सारो कोरो. भोज, गांधीघाम जॅडे सहेरें में जेडा बई कम्युनीटी ( गुजराती,सींधी,हींदीभाषी,….) जा माडु प रेंता होडा ओप्सनल कोर्स तरीके रखेमें अची सगॅतो. १ थी १० क्लास सुधीजो अभ्यासक्रम पांजा कवि, साहित्यकार ने शिक्षक मलीने लखें त हेनके स्कूल में सखायला कच्छी प्रजा मजबूत मांग करे सगॅती. जॅडीते गुजरात, महाराष्ट्र,…. मे मातृभासा जो अभ्यासक्रम त हुऍतोज.

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समो

मिणींके हॅप्पी होरी

रसिया

होरीजा फाग गजें , धिलमें ओ रसिया,
ढोलीजा ढोल वजें, धिलमें ओ रसिया.

केसूडो डोले प्यो सीमके सोनजी करे,
मनजो माणीगर रंगसें पिचकारी भरे.

वरणागी रूप सजेँ , धिलमें ओ रसिया,
ढोलीजा ढोल वजें, धिलमें ओ रसिया.

खणीनें अभके, उभो आय हि जीवतर,
रंगजे हुभसें मुं भेगो मूंजो हमीरसर.

सोणां सट कढे भजें, धिलमें ओ रसिया,
ढोलीजा ढोल वजें, धिलमें ओ रसिया.

गामजे चोरेतें पुसेतो रंगसें फारियो,
खेतरमें खिले प्यो, चोकीधार चाडियो.

होरीगीत लजें , धिलमें ओ रसिया,
ढोलीजा ढोल वजें, धिलमें ओ रसिया.
***
-कृष्णकांत भाटिया ‘कान्त’

वसी विन

विश्व मात्रभासा डीं